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बिहार में चैती छठ पर्व का समापन, श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित किया

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बिहार में चार दिवसीय चैती छठ पर्व का बुधवार को भव्य समापन हुआ। सुबह-सुबह राज्य के विभिन्न जिलों के घाटों, नदियों और तालाबों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग विधि-विधान के साथ उगते सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर रहे थे। छठ व्रतियों ने इस दौरान परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की मंगलकामना और समाज की खुशहाली के लिए पूजा-अर्चना की। घाटों पर भक्ति, श्रद्धा और अनुशासन का नजारा देखने योग्य था।
छठ पर्व की चार दिन की कठोर व्रत यात्रा के बाद श्रद्धालु भगवान सूर्य और छठी मैया के समक्ष खड़े होकर अर्घ्य अर्पित करते नजर आए। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थ‍ित थीं, पुरुष और युवा अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा कर रहे थे। बच्चे भी माता-पिता के साथ घाटों पर आए और भक्ति गीतों में शामिल हुए। इस दौरान सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
हालांकि, इस पावन अवसर पर कुछ दुखद घटनाएं भी सामने आईं। राजधानी पटना के मालसलामी थाना क्षेत्र स्थित दमराही घाट पर गंगा स्नान के दौरान तीन युवक गहरे पानी में डूब गए। स्थानीय गोताखोरों और प्रशासन की मदद से दो युवकों के शव बरामद कर लिए गए, जबकि तीसरे युवक की तलाश जारी है। मृतकों की पहचान कंकड़बाग थाना क्षेत्र के रोहित कुमार और गणेश कुमार के रूप में हुई है। तीसरा युवक शिबू नामक है, जिसकी अभी भी खोज जारी है। बताया जा रहा है कि ये युवक जोगीपुर इलाके से अपने दोस्त के घर छठ पर्व में शामिल होने आए थे।
इसी तरह भोजपुर जिले के आरा में भी बिशुनपुर भागड़ नदी में दो बच्चों के डूबने की सूचना मिली। दोनों की मौत से पूरे इलाके में मातम पसरा। मृतकों में एक नागेंद्र पाठक का पुत्र था, जो बनारस में पढ़ाई करता था और छठ पर्व पर घर आया था। दूसरा युवक नरेंद्र प्रसाद का पुत्र था, जिसने हाल ही में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी।
पटना जिले के मनेर क्षेत्र में भी एक युवक के डूबने की खबर सामने आई। ब्रह्मचारी घाट के पास हुए इस हादसे के बाद से युवक की तलाश जारी है। इसके अलावा दनियावां प्रखंड के सूर्य मंदिर तालाब में भी एक व्यक्ति के डूबने की सूचना मिली है। स्थानीय प्रशासन और गोताखोर इस मामले में खोजबीन में जुटे हुए हैं।
नवादा जिले में एक अलग तरह का हादसा सामने आया। छठ घाट से लौट रहे एक युवक की बाइक की टक्कर से मौत हो गई। यह घटना रूपौ थाना क्षेत्र के कनौलिया गांव के पास हुई, जिससे परिजनों में कोहराम मच गया।
इन हादसों के बावजूद पूरे बिहार में चैती छठ पर्व पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। चार दिनों तक कठिन व्रत और नियमों का पालन करने वाले श्रद्धालुओं ने पूरी निष्ठा के साथ भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा की। घाटों पर महिलाएं, पुरुष, बच्चे और युवा पारंपरिक वेशभूषा में भक्ति गीत गाते नजर आए।
अर्घ्य देने के बाद छठ व्रतियों ने बड़ों का आशीर्वाद लिया और प्रसाद का वितरण किया। इस दौरान सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का दृश्य देखने को मिला। यह पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि बिहार की लोकसंस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाज का जीवंत उत्सव भी है।
छठ पर्व के दौरान घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तैनाती की थी। श्रद्धालु नियमों का पालन करते हुए एक-दूसरे की मदद करते नजर आए। घाटों पर साफ-सफाई और अनुशासन बनाए रखने के लिए स्वयंसेवक भी सक्रिय रहे।
चार दिन के कठिन व्रत और कठोर नियमों के पालन के बावजूद लोग अपने उत्साह और भक्ति भाव के साथ हर घाट पर पहुंचे। यह पर्व न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि बिहार में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता का भी प्रमाण है।
इस प्रकार, बिहार में चैती छठ पर्व ने फिर से यह साबित कर दिया कि यह केवल पूजा-अर्चना का अवसर नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन, परंपरा और सामूहिक सांस्कृतिक अनुभव का जीवंत उत्सव है।

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